अल्पसंख्यक जैन समुदाय का योगदान 1. जैन संस्कृति विश्व की महान एवं प्राचीन संस्कृतियों में से एक है। 2. हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो की खुदाई में प्राप्त मुद्रा एवं उस पर अंकित ऋषभदेव का सूचक बैल तथा सील नं.449 पर स्पष्ठ रूप से जिनेश्वर शब्द का अंकन होना तथा वेदों की 141 ऋचाओं में भगवान ऋषभदेव का आदर पूर्वक उल्लेख इस संस्कृति को वेद प्राचीन संस्कृति सिद्ध करती हैं। 2. हमारे देश भारत वर्ष का नाम ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती भरत के नाम से विख्यात है जो कि जग जाहिर प्रमाण है। विष्णु पुराण में भी इसका ऊल्लेख मिलता है। हमारे देश के प्रधान मंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरु ने उड़ीसा के खंडगिरी स्थित खारवेल के शिला लेख पर "भरतस्य भारत" रूप प्रशस्ति को देख कर ही इस देश का संवैधानिक नामकरण भारत किया था। 3. राजा श्रेणिक, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य , कलिंग नरेश खारवेल एव सेनापति चामुंडराय , सम्राट संप्रति, सम्राट बिंबिसार, कर्नाटक की रानी अब्बक्का चौटा जैन इतिहास के महान शासक हुए है। 4. जैन पुराणों के अनुसार सती चंदन बाला, मैना सुंदरी एवं रानी रेवती आदि अ...
*णमोकार महामंत्र का महात्म्य* _जैन दर्शन में णमोकार महामंत्र जिसे नमस्कार मंत्र भी कहा जाता है, यह एक पवित्र मंत्र है। यह मंत्र जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रतीक है और इसे जैन परम्परा का सबसे प्रमुख एवं सर्व व्यापक मंत्र माना जाता है। इसका उच्चारण करने से साधक को शांति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। इस मंत्र में किसकी स्तुति की गई है, इस मंत्र की विशेषता और महत्व क्या है ? इस विषय को समझते है।_ *णमोकार महामंत्र-* *णमो अरिहंताणं,* *णमो सिद्धाणं* *णमो आइरियाणं* *णमो उवज्झायाणं* *णमो लोएसव्व साहूणं।।* _अर्थात् नमस्कार हो लोक के सभी अरिहंतो को, नमस्कार हो लोक के सभी सिद्धों को, नमस्कार हो लोक के सभी आचार्यों को, नमस्कार हो लोक के सभी उपाध्यायों को और नमस्कार हो लोक के सभी साधुओं को।_ *णमोकार महामंत्र की विशेषता -* *1- रचना -* _णमोकार महामंत्र की रचना किसी ने नहीं की है यह स्वयमेव रचा हुआ है, शाश्वत है, अनादिकाल से प्रवर्तमान अनादि अनिधन मंत्र है। इस मंत्र को ईसा की पहली शताब्दी में सर्वप्रथम आचार्य श्री पुष्...