*णमोकार महामंत्र का महात्म्य* _जैन दर्शन में णमोकार महामंत्र जिसे नमस्कार मंत्र भी कहा जाता है, यह एक पवित्र मंत्र है। यह मंत्र जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रतीक है और इसे जैन परम्परा का सबसे प्रमुख एवं सर्व व्यापक मंत्र माना जाता है। इसका उच्चारण करने से साधक को शांति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। इस मंत्र में किसकी स्तुति की गई है, इस मंत्र की विशेषता और महत्व क्या है ? इस विषय को समझते है।_ *णमोकार महामंत्र-* *णमो अरिहंताणं,* *णमो सिद्धाणं* *णमो आइरियाणं* *णमो उवज्झायाणं* *णमो लोएसव्व साहूणं।।* _अर्थात् नमस्कार हो लोक के सभी अरिहंतो को, नमस्कार हो लोक के सभी सिद्धों को, नमस्कार हो लोक के सभी आचार्यों को, नमस्कार हो लोक के सभी उपाध्यायों को और नमस्कार हो लोक के सभी साधुओं को।_ *णमोकार महामंत्र की विशेषता -* *1- रचना -* _णमोकार महामंत्र की रचना किसी ने नहीं की है यह स्वयमेव रचा हुआ है, शाश्वत है, अनादिकाल से प्रवर्तमान अनादि अनिधन मंत्र है। इस मंत्र को ईसा की पहली शताब्दी में सर्वप्रथम आचार्य श्री पुष्...
जैन धर्म : समन्वय है, परंतु विलय नहीं (अल्पसंख्यक दर्ज़े पर उठते प्रश्न और जैन समाज की स्वतंत्र पहचान)
*जैन धर्म : समन्वय है, परंतु विलय नहीं* (अल्पसंख्यक दर्ज़े पर उठते प्रश्न और जैन समाज की स्वतंत्र पहचान) डॉ.इंदु जैन सलाहकार अल्पसंख्यक आयोग भारत की सांस्कृतिक परंपरा का सबसे बड़ा गुण उसकी विविधता और सहअस्तित्व की भावना है। यहाँ अनेक धार्मिक धाराएँ, संप्रदाय और दार्शनिक परंपराएँ हजारों वर्षों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। इसी बहुलतावादी परंपरा ने भारतीय समाज को एक अनोखी पहचान दी है। जैन धर्म भी इसी प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक धारा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट परंपरा है। किंतु समय-समय पर यह प्रश्न उठाया जाता रहा है कि जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान क्या वास्तव में अलग है या वह केवल हिंदू धर्म की एक शाखा भर है। हाल के वर्षों में यह बहस फिर से सामने आई है, विशेषकर तब जब कुछ राजनीतिक व्यक्तित्व जैन समाज के अल्पसंख्यक दर्ज़े पर पुनर्विचार की बात कर रहे हैं और व्यर्थ की बयानबाजी कर रहे हैं । यह स्मरण रखना आवश्यक है कि जैन समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्ज़ा वर्ष 2014 में प्रदान किया गया था। यह निर्णय किसी आकस्मिक राजनीतिक घोषणा का परिणाम नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल...