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Showing posts from February, 2025

श्रीनाना शंकरसेठ जैन ने भारत में रेल चलवाई थी

आज भारत में जो रेलवे है, उसको भारत में कौन लाया.? आपका उत्तर होगा ब्रिटिश.! जी नहीं..ब्रिटिश सिर्फ विक्रेता थे। वास्तव में भारत में रेलवे लाने का स्वपन एक भारतीय जैन का था.! भारत में रेलवे आरम्भ करने का श्रेय हर कोई अंग्रेजों को देता है, लेकिन श्रीनाना जगन्नाथ शंकर सेठ मुर्कुटे जैन के योगदान और मेहनत के बारे में कदाचित कम ही लोग जानते हैं। 15 सितंबर 1830 को दुनिया की पहली इंटरसिटी ट्रेन इंग्लैंड में लिवरपूल और मैनचेस्टर के बीच चली। यह समाचार हर जगह फैल गया। बम्बई में एक व्यक्ती ने सोचा कि उनके शहर में भी ट्रेन चलनी चाहिए। अमेरिका में अभी रेल चल रही थी और भारत जैसे गरीब और ब्रिटिश शासित देश में रहने वाला यह व्यक्ति रेलवे का स्वप्न देख रहा था। कोई और होता तो जनता उसे ठोकर मारकर बाहर कर देती। लेकिन यह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नहीं था। यह थे बंबई के साहूकार श्रीनाना शंकरशेठ जैन। जिन्होंने स्वयं ईस्ट इंडिया कंपनी को ऋण दिया था। है न...आश्चर्यजनक। श्रीनाना शंकरशेठ का मूल नाम था जगन्नाथ शंकर मुर्कुटे जैन, जो बंबई से लगभग 100 कि. मी. मुरबाड़ से थे। पीढ़ीगत रूप से समृद्...

मातंग वंश के घरोंमे गुंजता है णमोकार मंत्र....

मातंग वंश के घरोंमे गुंजता है णमोकार मंत्र....   आठ साल पूर्व जेष्ठ साहित्यिक, जैन धर्म के अभ्यासक, विचारवंत श्री विठ्ठल साठेजी के नेतृत्व में जैन विचार मंच की स्थापना हुई| मातंग वंश प्राचीन कालसे जैन धर्म का अविभाज्य अंग है , इस सत्य की खोज  उन्होंने की और मातंग वंश के लोगो को जैन धर्म मे पुन्हा स्थितिकरण करने का प्रारंभ उन्होंने किया| मातंग वंश के लोगो को जैन धर्म का परिचय करके देना, मातंग वंश मे जैन धर्म का प्रचार, प्रसार करना यह कार्य उन्होंने शुरु किया , इस पवित्र अभियान में मातंग वंश के बहुतसे  परिवार शामिल हुए| अब तक ३०० से ज्यादा परिवारोंने  जैन धर्म में अपना स्थितिकरण कर लिया है| इस  अभियान का परिणाम मातंग वंश के घरोंमे णमोकार मंत्र गुंजने लगा है| यह आश्चर्यकारक क्रांती है !   जैन विचार मंच के इस कार्य मे प्रस्थापित जैनोंका साथ प्राप्त हो रहा है! सभी के नाम नहीं देना संभव नही, परंतु कुछ मान्यवरोंका उल्लेख करना आवश्यक हैं| श्री. राजेन्द्र सुराणा, श्री. श्रीपाल ललवाणी,  श्री.विजय पारेख, श्री.शांतीनाथ जैन, श्री.नितिन जैन, श्री.महावीर सांगलीकर, श्...

आचार्य कुन्दकुन्द जयंती ( बसंत पंचमी)

आचार्य कुन्दकुन्द जयंती ( बसंत पंचमी)                           प्रो अनेकान्त कुमार जैन   आचार्य विद्यानंद जी मुनिराज के अनुसार आचार्य कुन्दकुन्द का जन्म ईसा की प्रथम शताब्दी में माघ शुक्ल पंचमी अर्थात बसंत पंचमी के दिन हुआ था | बसंत पंचमी का दिन  जैन सरस्वती जिनवाणी के उस महान तपस्वी विद्वान साधक आचार्य कुंदकुंद का जन्म जयंती दिवस है |  आचार्य कुन्दकुन्द जैन धर्म के सर्वोपरि आचार्य माने जाते हैं।  भगवान महावीर और गौतम गणधर के बाद उन्हें तीसरा स्थान प्राप्त है -  मंगलं भगवान वीरो, मंगलं गौतमोगणी| मंगलं कुन्दकुंदाद्यो, जैन धर्मोऽस्तु मंगलं|| जिस प्रकार भगवान महावीर, गौतम गणधर और जैनधर्म मंगलरूप हैं, उसी प्रकार कुन्दकुन्द आचार्य भी। विशेष रूप से द्रव्यानुयोग के क्षेत्र में इन जैसा प्रतिभाशाली आचार्य प्रायः दूसरा आचार्य दिखलाई नहीं पड़ता।         कुन्दकुन्द के जीवन-परिचय के सम्बन्ध में विद्वानों ने सर्वसम्मति से जो स्वीकार किया है, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि ये दक्षिण भा...