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धर्म /संप्रदाय की समीक्षा

दूसरे के धर्म /संप्रदाय की समीक्षा करते वक्त हम जितने यथार्थवादी हो जाते हैं उतने यथार्थवादी यदि अपने धर्म/संप्रदाय  की समीक्षा में हो जाएँ तो शायद हम सत्य को जान पायें | -कुमार अनेकान्त

‘अहिंसा दर्शन’ यानि पारंपरिक ऊर्जा के साथ आधुनिक हस्तक्षेप

सादर प्रकाशनार्थ -        ‘अहिंसा दर्शन’ यानि पारंपरिक ऊर्जा के साथ आधुनिक हस्तक्षेप अनुराग बैसाखिया [1]             डॉ . अनेकांत कुमार जैन की नयी कृति ‘ अहिंसा दर्शन : एक अनुचिंतन ’ विश्व शान्ति और अहिंसा पर लिखी गयी तमाम पुस्तकों में से अलग इस दृष्टि से है क्यूँ कि यह उन   सभी पुस्तकों के निष्कर्षों तथा लेखक के मौलिक चिंतन और अनुसंधान का ऐसा मेल है जो हमें उन अनुभूतियों में ले जाता है जो प्राचीन तथा अर्वाचीन आचार्यों द्वारा प्रसूत हुईं हैं | यह किताब सहजता के साथ हमें आज की मौजूदा समस्यायों और परिस्थितियों में अहिंसक होने की प्रेरणा देकर तार्किक तथा प्रायोगिक रूप से उसका समाधान बताने की एक सार्थक पहल भी करती है |पुस्तक में लेखक ने किसी किस्म के दुराग्रह से मुक्त होने की पूरी कोशिश की है जैसे धर्मों में लगभग संसार के सभी प्रमुख धर्म इसमें लिए गए हैं हाँ जैन धर्म में अहिंसा की व्याख्या ज्यादा है इसलिए उसकी व्याख्या पर अधिक बल स्पष्ट दिखाई देता है इसका कारण यह भी है कि लेखक स्वयं जैन...

REPUBLIC DAY AND RELIGION

जिस दिन भारत के मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों में गणतंत्र दिवस मनाया जाने लगेगा और तिरंगा लहराना अनिवार्य कर दिया जायेगा उस दिन से भारत की तरफ कोई भी दुश्मन आँख तक नहीं उठाएगा |-अनेकान्त

ग्लोबल सामायिक क्यों

ग्लोबल सामायिक क्यों ? ......जैन एकता का एक विनम्र प्रयास (अपने विचार शेयर करें ) हमारे कई पंथ हैं,रहें उनके उपासना के अलग अलग ढंग हैं,रहें हम कई सामायिक करते हैं,करें हमारे अलग अलग गुरु हैं,रहें हम रोज मंदिर जाते हैं,जाएँ हम मंदिर नहीं मानते ,न मानें पर सुबह ८ बजे सिर्फ १५ मिनट खुद के लिए और खुदा के लिए ऑंखें बंद करके सुखासन में बैठ कर अपनी आत्मा और परमात्मा का ध्यान पूरे विश्व में सभी जैन चाहे वो किसी भी पंथ के हों एक समय पर एक साथ १५ मिनट सामायिक करें तो एकता कैसे न होगी आत्मा भी निर्मल होगी वैश्विक पहचान भी बनेगी आप ट्रेन में हों प्लेन में हों ऑफिस में हों या दुकान पर हों पार्क में हों या प्लेट फार्म पर हों समय पर सामायिक करें तो अपनी आत्मा ,तीर्थंकर परमात्मा और उसी समय पूरे विश्व के साधर्मी जैनों से एक साथ जुडेंगे यह ग्लोबल सामायिक पंथ निरपेक्ष है हमारा झंडा एक हो गया , तीन लोक वाला चिन्ह एक हो गया , ये पूरे विश्व ने जान लिया कोई एक आचरण भी एक हो जाये ताकि वो भी एक पहचान बन जाये काफी रिसर्च के बाद मैंने खोज की कि हम आध्यात्म से एक ह...
विश्व विख्यात विद्वान डॉ हुकुम चंद भारिल्ल JIN FOUNDATION ,NEW DELHI में प्रो.फूलचंद प्रेमी जी के साथ मंत्रणा करते हुए .