बारस अणुवेक्खा की सर्वोदया टीका का वैशिष्ट्य और इसके कुछ चिन्तन बिन्दु : –प्रोफेसर फूलचंद जैन प्रेमी, वाराणसी तीर्थंकर महावीर क वाणी को अपने द्वारा रचित अनुपम शास्त्रों के माध्यम से हम तक पहुचाने वाले प्राचीन जैनाचार्यों में प्रथम शती के महान् आचार्य कुन्दकुन्द का विशिष्ट स्थान है। इसीलिए तो तीर्थंकर महावीर की परम्परा में गौतम गणधर के बाद आचार्य कुन्दकुन्ददेव का नाम स्मरण करते हुए मंगलाचरण किया जाता है- मंगलं भगवान् वीरो मंगलं गौतमो गणी। मंगलं कुन्दकुन्दाद्यो जैनधर्मोऽस्तु मंगलम् ।। शौरसेनी प्राकृत साहित्य के पंचास्तिकाय, प्रवचनसार, समयसार, नियमसार, अष्टपाहुड़, बारस अणुवेक्खा तथा दस भक्तियाँ जैसे अनेक उत्कृष्ट आगमिक ग्रन्थरत्नों के सर्जक हैं आचार्य कुन्दकुन्द। इनमें भी इनका समयसार ग्रन्थ तो एकमात्र अध्यात्म प्रधान ऐसा उत्कृष्ट ग्रन्थ है, जिसकी सम्पूर्ण विश्व साहित्य में कोई तुलना ही नहीं है। इसी तरह इनके अन्य सभी ग्रन्थ अपने-अपने विषय के बेजोड़ ग्रन्थरत्न हैं। इनके प्रमुख ग्रन्थों पर आचार्य अमृतचन्द्र, आचार्य जयसेन, आचार्य पद्मप्रभ मलधारीकृत बड़ी ही महत...