👣*एक जर्मन जैन साधिका*: *लेडी शर्लेटी ब्राउन*👣 ‼️‼️💐‼️‼️ 🦋जैन समाज में शायद ही आज कोई ऐसा श्रावक होगा जिसे इस सच्ची कहानी का पता हो? यह उन दिनों की बात है जब भारत पर अंग्रेजी सत्ता राज कर रही थी। 🦋जर्मन निवासी *मिस शर्लेटी ब्राउन* एक ईसाई युवा महिला विदुषी थीं, जो आज से लगभग 100-110 वर्ष पूर्व भारत आई थीं। उन्हें जर्मन सरकार से 'प्राच्य विद्या' (Oriental Knowledge of Spirituality) पर भारत में शोध करने के लिए छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिली थी। प्राच्य विद्या पर अपने शोध-कार्य के दौरान उन्होंने जैन धर्म के ग्रंथों का भी गूढ़ अध्ययन किया। अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उन्हें कई जैन श्वेतांबर साधु- साध्वियों के संपर्क में आने का अवसर भी प्राप्त हुआ। 🦋जैसे-जैसे उनका अध्ययन आगे बढ़ा, जैन धर्म और संस्कृति के प्रति उनका लगाव और गहरा होता गया। सत्संग के लाभ तथा जैन साध्वियों के जीवन को निकट से जानने के लिए उन्होंने श्वेतांबर साध्वियों के साथ शिवपुरी, ग्वालियर आदि से गुजरात की पदयात्राएं भी की थीं और सत्संग के साथ-साथ जैन तीर्थों के दर्शन का पुण्य लाभ लिया था। 🦋जब उनकी ...