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उत्तम आर्जव

🌼 *जिन देशना* 🌼

✨ *धर्म दिखावे का विषय* नहीं, *आंतरिक शुद्धता* का मार्ग है।
जहाँ छल है, वहाँ धर्म नहीं;
और जहाँ धर्म नहीं, वहाँ मोक्षमार्ग भी नहीं।
---

1️⃣ *“जब आपके साथ छल होगा, तब आप सहन नहीं कर सकेंगे”*

यह वाक्य हमें 🔍 आत्मचिंतन की ओर ले जाता है।
जो व्यक्ति स्वयं छल करता है, वह यह भूल जाता है कि
👉 *वही छल जब उस पर लौटकर आता है, तो उसे सबसे अधिक पीड़ा होती है* 😔

📌 इससे स्पष्ट होता है—

छल स्वभावतः दुःखदायी है

*जो कर्म हम दूसरों के साथ करते हैं, वही कर्म हमें भोगने पड़ते हैं* 🔄


➡️ अतः जो छल को गलत मानते हैं, उन्हें किसी भी रूप में छल का प्रयोग नहीं करना चाहिए, विशेषकर मोक्षमार्ग में 🚫

---

2️⃣ *“मोक्षमार्ग में छल सहित प्रवर्तन मत करो”*

🛤️ मोक्षमार्ग का अर्थ है—

*आत्मा को बंधनों से मुक्त करना*

*राग–द्वेष, कपट, मान, माया का क्षय करना*


यदि कोई व्यक्ति—

धर्म का आचरण छलपूर्वक करता है

भीतर कुछ और, बाहर कुछ और दिखाता है 🎭


तो वह मोक्षमार्ग पर आगे नहीं, पीछे जा रहा है।

👉 *छल = माया*
👉 *माया = कर्मबंधन*
👉 *कर्मबंधन = संसार* ⛓️


---

3️⃣ *“धर्मात्मा दिखने के लिए धर्म कर रहे हैं, तो वह समय की बर्बादी है”*

यह वचन कठोर है, पर सत्य है ⚖️

यदि धर्म—

*प्रशंसा पाने के लिए हो* 👏

*मान–सम्मान के लिए हो* 🏅

*स्वयं को बड़ा दिखाने के लिए हो*


तो वह धर्म नहीं, बल्कि सूक्ष्म छल है ❗

ऐसा धर्म—

अहंकार बढ़ाता है

आत्मा को भारी करता है

पुण्य नहीं, बंधन उत्पन्न करता है


👉 इसलिए कहा गया है—

*> “आप धर्म के नाम पर शुद्ध छल ग्रहण कर रहे हैं”*
--

4️⃣ *“जगत में भी छलग्रहण करने वाला हीन और निम्न माना जाता है…”*

🌍 सामान्य संसार में भी—

छल करने वाला अविश्वसनीय माना जाता है

लोग उससे दूरी बना लेते हैं 🚶‍♂️➡️🚶‍♀️


तो फिर 🕊️ *मोक्षमार्ग, जो पूर्ण पवित्रता का मार्ग है*, वहाँ छल करने वाला—

*उच्च गति कैसे पाएगा*?

उत्तम परिणाम की आशा कैसे करे?


👉 *इसलिए छल ग्रहण करने वाले को हीन गतियाँ प्राप्त होती हैं—इसमें कोई आश्चर्य नहीं।*


---

5️⃣ *“धर्मात्मा दिखने में नहीं, धर्मात्मा बनने में पुरुषार्थ करो”*

🌟 यही इस देशना का सार-वाक्य है।

धर्मात्मा बनने का अर्थ—

भीतर से सरल होना

विचार, वचन और कर्म में एकरूपता

जो हैं, वही दिखना 🤍


जब पुरुषार्थ—

दिखावे में नहीं

बल्कि *स्वभाव-परिवर्तन* में लगता है


तो निश्चित ही सच्चा मार्ग प्राप्त होता है 🙏


---

6️⃣ *“अनादि से आज तक छल ग्रहण किया, उसका दुष्परिणाम यह संसार है”*

यह गहरी 🧠 दार्शनिक सत्यता है।

अनादि काल से—

*माया, कपट, छल को अपनाने से*

*आत्मा ने कर्म बाँधे*

और वही कर्म संसार बने


👉 *संसार कोई बाहरी वस्तु नहीं*,
👉 *यह आत्मा के विकारों का परिणाम है* 🔥


-
7️⃣ *“अब संसार से छूटना है तो छल ग्रहण मत करो”*

यदि लक्ष्य है—

*संसार से मुक्ति* 🕊️

*जन्म–मरण से छुटकारा* ♻️


तो उपाय स्पष्ट है—
👉 छल का त्याग

क्योंकि—

छल नया कर्म बाँधता है

त्याग कर्मों की निर्जरा करता है ✨
---

8️⃣ *“निश्चल स्वभाव पर दृष्टि ऊर्ध्व कर*…”

🌿 निश्चल स्वभाव का अर्थ—

*सरलता*

*निष्कपटता*

*सीधापन*


जब साधक—

अपने स्वभाव को निश्चल बनाता है

उसी पर दृष्टि टिकाता है 👁️

तो—

*आत्मा विशुद्ध होती है*

*शुद्धि बढ़ती है*

और अंततः कल्याण होता है 🌸
---

🌺 *निष्कर्ष* 🌺

👉 *धर्म का मर्म बाहरी आडंबर नहीं, आंतरिक ईमानदारी है*
👉 *छल चाहे सूक्ष्म हो या स्थूल, मोक्षमार्ग का शत्रु है*
👉 *निश्चल, सरल, निष्कपट स्वभाव ही सच्चा धर्म है*

🙏
— *राजेश जैन, मैनपुरी*

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