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मैं नालंदा विश्वविद्यालय बोल रहा हूँ

मैं नालंदा विश्वविद्यालय बोल रहा हूँ। आज मैं आपको अपने गौरवशाली इतिहास के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसके बारे में आज की पीढ़ी कम ही जानती है। हाँ, मैं वही विश्वविद्यालय हूँ जो एशिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी हुआ करता था। लेकिन एक नरभक्षी, पागल राक्षस, क्रूर और सनकी तुर्की शासक बख्तियार खिलजी ने मुझे और मेरे जैन तथा हिन्दू पुस्तक भंडार को जलाकर राख कर दिया था। 6 महीनों तक मैं जलता रहा, किसी ने मेरी सुध नहीं ली। आज मैं आपको मेरी कहानी सुनाऊंगा, जिससे आपकी आँखें भी भीग जाएंगी। मेरी स्थापना 5वीं शताब्दी में महान राजा कुमारगुप्त ने की थी। यह वह समय था जब भारत में शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख केंद्र था। इसके बाद राजा हर्षवर्धन और राजा देवपाल ने भी मेरे निर्माण और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मेरा परिसर लगभग 10 किलोमीटर लंबा और 5 किलोमीटर चौड़ा था, जिसमें 100 से अधिक भवन और इमारतें थीं। मेरे प्रांगण में 10,000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे और उन्हें पढ़ाने के लिए 1,600 आचार्य और जैन पंडित मौजूद रहते थे। यहाँ पर विभिन्न विषयों की पढ़ाई होती थी...

तत्त्वार्थसूत्र उच्चारण विधान

*श्रुत उच्चारण पाठ:*  💠💠💠💠💠💠💠💠 डॉ राकेश जैन शास्त्री ,नागपुर   _तत्त्वार्थ सूत्र के उच्चारण के लिए उच्चारण करते समय कौन सा अक्षर सामने आने पर किस अक्षर का उच्चारण होगा, इसे समझने के लिए यह पाठ दिया गया है।_   *(1)* _अ , ह और कवर्ग( क,ख,ग,घ,ङ् )यह_ _7 अक्षर सामने आने पर~_         _"ङ्" का उच्चारण_ _होगा।_   *(2)*  _व , इ , श , य और चवर्ग( च,छ,ज,झ,ञ )यह 9_ _अक्षर सामने आने पर~_        _"ञ्" का उच्चारण होगा।_   *(3)* _ऋ,र,और टवर्ग (ट,ठ,ड,ढ,ण)यह 7 अक्षर_ _सामने आने पर~_        _"ण्" का उच्चारण होगा।_   *(4)* _स,ल और तवर्ग (त,थ,द,ध,न,)यह 7 अक्षर_ _सामने आने पर~_         _"न्" का उच्चारण होगा।_   *(5)* _उ और पवर्ग (प,फ,ब,भ,म)यह 6 अक्षर_ _सामने आने पर~_           _"म्" का उच्चारण_ _होगा।_   *जैसे~* _"सत्संख्या" यह सूत्र का एक हिस्सा समझने_ _के लिए है। इसमें  "स" के_ _ऊपर जो अनुस्वार ह...

वस्तुपाल जैन तेजपाल जैन की गौरव गाथा

वस्तुपाल तेजपाल की गौरव गाथा । जैन धर्म की गौरव गाथाओं की बात करे और वस्तुपाल तेजपाल की बात न हो तो वह अधूरी मानी जाती है इसे धर्मकर्ता जिनआज्ञां पलक वस्तुपाल तेजपाल दोनों भाइयो ने जैन धर्म के प्रति बहुत ही अद्भुत कार्य किये जिन्हें बताते हुए हमें बहुत ही हर्ष महसूस होता है । 1300 शिखरबद्ध जिनालय बनाए । 3 लाख द्रव्य खर्च करके शत्रुंजय पर तोरण बांधा । 3202 जिनमन्दिर के जीर्णोद्धार करवाए । वर्ष में तीन बार संघ पूजा तथा साधर्मिक वात्सल्य करते थे । 105000 जिन प्रतिमा भरवाई । 984 पौशाधशालाएं बनवाई । 1000 सिंहासन महात्माओं के लिए करवाए । 702 धर्मशालाएं बनवाई । 1000 दानशालाएं बनवाई । 35 लाख द्रव्य खर्च करके खंभात में ज्ञान भंडार बनवाए । 400 पानी की परब बनवाई । 500 सिंहासन हाथी दांत के बनवाए । 700 पाठशालाएं पढ़ने के लिए बनवाई । 12 बार शत्रुंजय जी तीर्थ पर संघ ले गए । 1000 बार संघ पूजा की । 🙏 जय जिनेन्द्र 🙏

भारत के 25 प्राचीन विश्वविद्यालय.

प्राचीन भारत में शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल इतिहास है। हमारे प्राचीन भारत के 25 प्राचीन विश्वविद्यालय... दुनिया भर से हजारों प्रोफेसर और लाखों छात्र यहां रहते थे और कई विज्ञानों और विषयों का अध्ययन और अध्यापन करते थे। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों की जानकारी दी जा रही है: 1.नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University): स्थान: बिहार स्थापना: 5वीं शताब्दी ईस्वी विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और इसमें विभिन्न विज्ञान, दर्शन, और धर्म का अध्ययन किया जाता था। यहाँ पर 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे। 2.तक्षशिला विश्वविद्यालय (Taxila University): स्थान: पाकिस्तान स्थापना: 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व विशेषता: यह भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यहाँ पर चिकित्सा, कानून, कला, सैन्य विज्ञान आदि की शिक्षा दी जाती थी। 3.विक्रमशिला विश्वविद्यालय (Vikramshila University): स्थान: बिहार स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी विशेषता: यह भी बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। 4.ओदंतपुरी विश्वविद्यालय (Odantapuri University): स्थान: बिहार स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी विशेषता: बौद्ध श...

जैन धर्म: बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक

जैन धर्म: बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक 7 मयूर मल्लिनाथ वग्याणी, सांगली, महाराष्ट्र + 91 9422707721 जैन धर्म सबसे पुराना धर्म है. प्राचीन भारत में जम्बूद्वीप-भरत क्षेत्र की स्थापना आदिनाथ के पुत्र चक्रवर्ती भरत ने की थी और उन्हीं से हमारे देश का नाम भारत पड़ा. उस समय जैन धर्म पूरे भारत में फैला हुआ था। जैन धर्म के उत्थान और पतन में राजाश्रय ही मुख्य कारण था.  तो सवाल उठता है कि इतना बड़ा जैन समाज अचानक कहां चला गया? जैन धर्म के पतन का कारण क्या है मूलतः जैन समाज का पतन आठवीं-नौवीं शताब्दी में प्रारम्भ हुआ. इसे भक्ति आंदोलन के नाम से शंकराचार्य (7वीं शताब्दी) ने शुरू किया था. हाजारों जैनियों और बौद्धों का नरसंहार किया गया.  बाद के समय में कुमारिल भट्ट (8वीं शताब्दी), रामानुजाचार्य (11वीं शताब्दी), महादेवाचार्य (13वीं शताब्दी) ने आक्रामक रूप से अपने वैदिक धर्म का विस्तार करना शुरू कर दिया. बाद में राजाओंको धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया गया .  जैसे ही राजा ने अपना धर्म बदला, प्रजा भी डर के मारे अपना मूल जैन धर्म छोड़कर वैदिक धर्म में प्रवेश कर गयी. हजारों जैन मं...

क्या सिंधु सभ्यता जैन श्रमण सभ्यता है ?

*क्या सिंधु सभ्यता जैन श्रमण सभ्यता है ? इतिहासकार अर्नाल्ड जे टायनबी ने कहा था कि, विश्व के इतिहास में अगर किसी देश के इतिहास के साथ सर्वाधिक छेड़ छाड़ की गयी है, तो वह भारत का इतिहास ही है। भारतीय इतिहास का प्रारम्भ तथाकथित रूप से सिन्धु घाटी की सभ्यता से होता है, इसे हड़प्पा कालीन सभ्यता या सारस्वत सभ्यता भी कहा जाता है। बताया जाता है, कि वर्तमान सिन्धु नदी के तटों पर 3500 BC (ईसा पूर्व) में एक विशाल नगरीय सभ्यता विद्यमान थी। मोहनजोदारो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल आदि इस सभ्यता के नगर थे। पहले इस सभ्यता का विस्तार सिंध, पंजाब, राजस्थान और गुजरात आदि बताया जाता था, किन्तु अब इसका विस्तार समूचा भारत, तमिलनाडु से वैशाली बिहार तक, आज का पूरा पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान तथा (पारस) ईरान का हिस्सा तक पाया जाता है। अब इसका समय 7000 BC  से भी प्राचीन पाया गया है। इस प्राचीन सभ्यता की सीलों, टेबलेट्स और बर्तनों पर जो लिखावट पाई जाती है उसे सिन्धु घाटी की लिपि कहा जाता है। इतिहासकारों का दावा है, कि यह लिपि अभी तक अज्ञात है, और पढ़ी नहीं जा सकी। जबकि सिन्धु घाटी की लिपि से समकक्ष और...

एक शिक्षक के जीवन की अंतिम शाम

यह एक शिक्षक के जीवन की अंतिम शाम थी"...                *दिनकर सर .....अपने  विद्यार्थियों के बीच  काफी लोकप्रिय  एक सेवा निवृत शिक्षक।   3 दिन पूर्व ही  शहर के एक अस्पताल में इलाज के चलते उनका  देहावसान हो गया था।* *उनको श्रद्धांजलि देने हेतु  आज प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। समय हो चला था इसलिए लोगे एकत्रित हो रहे थे।*  *ठीक समय पर सभा शुरू हुई। एक-एक कर  उनके विद्यार्थियों ने और कुछ  लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।* *अभी सभा चल ही रही थी कि एक अनजान व्यक्ति ने प्रवेश किया और यह कहते हुए सबको चौंका दिया कि अस्पताल में दिनकर सर के  बेड पर तकिये के नीचे यह लिफाफा मिला , जिस पर लिखा है कि इसे  मेरी प्रार्थना सभा में ही खोला जाए।* *दिनकर सर की इच्छा के अनुरूप एक व्यक्ति ने लिफाफा खोला। लिफाफे एक पत्र प्राप्त हुआ। माइक से उस पत्र का वाचन शुरू किया-* *"प्रिय आत्मीय बंधुओ,* *जब यह पत्र पढ़ा जा रहा होगा  तब तक मैं संसार से विदा ले चुका होंगा मेरा यह पत्र मुख्यतः श...