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खाद्य पदार्थों के नाम संस्कृत में | Food Names in Sanskrit

खाद्य पदार्थों के नाम संस्कृत में | Food Names in Sanskrit
सुबह का नाश्ता (Breakfast) – प्रातराशः
दोपहर का भोजन (Lunch) – अहराशः
रात का खाना (Dinner) – नक्ताशःरोटी (Bread) – मृदुरोटिका
अन्न (Grain) – अन्नम्
आटा (Flour) – चूर्णम्
पुरी (Puri) – पूरिका
बाजरा (Millet) – प्रियंगुः
गेहूँ (Wheat) – गोधूमः
धान (Grain) – धान्यम्
जौ (Barley) – यवः
मूँगफली (Peanuts) – मुद्गफली
मूँग (Coral) – मुद्गः
उड़द (Urad) – माषः
गेहूं की रोटी (Wheet Roti) – गोधूमरोटिका
तली हुई रोटी (Fried Roti) – अङ्गाररोटिका
तेल वाली रोटी (Oiled Roti) – तैलरोटिका
ज्वार की रोटी (Jowari Roti) – जूर्णरोटिका
रागी रोटी (Ragi Roti) – कोद्रवरोटिका
गेहूं उपमा (Wheet Upama) – गोधूमपिष्टिका
परौंठा (Protha) परौंट:
चितरना (Chitranna) – चित्रान्नम्
तिल – तिलः
मसूर (Lentil) – मसूरः
दाल (Dal) – सूपः, द्धिदलम्
करी (Curry) – व्यञ्जनम्
दाल करी (Dal Curry) – शाकसूपः
अचार (Pickle) – उपदंशः
चटनी (Chutuney) – उपसेचनम्
सब्जी (Sabji) व्यंजनम्
सब्जी का सूप (Vegetable Soup) – शाकतरला
तली हुई सब्जी (Fried Curry) – भर्जितशाकम्
भरवां करी (Stuffed Curry) – सोपस्करशाकः
रायता (Raita) दाधेयम्
सांभर (Sambar) – क्वथितम्
इडली (Idly) – शाल्यपूपः
खिचड़ी (Khichri) कृशर:, कृशरा
पुलिहोरा (Pulihora) – कृसरान्नाम्
इमली की चटनी (Tamarind Chutney) – तिन्त्रिण्युपसेचनम्
पापड़ (Papad) – पर्पटः
पापड़ खिलाया (Disigned Papad) – परिकल्पवर्ध्यम्
चावल पापड़ (Rice Papad) – सागुवर्ध्यम्
मूंग का पापड़ (Moong Papad) – मुद्गपर्पटः
हलवा (Halwa) लप्सिका, संयाव:
पाणि पुरी (Pani Puri) – जलपूरीका
समोसा (Samosa) – समाशः
पालक पकोड़े (Palak Pakodi) – जीवन्तीपक्ववटी
पकौड़ी (Pakodi) – पक्ववटी
चिप्स (Chips) – कासालुः
स्नैक्स (Snacks) – उपाहारः
चॉकलेट (Chocolate) – चाकलेहः
पिज़्ज़ा (Pizza) – पिष्टजा
बर्गर (Burger) – शाकरोटिका
सैंडविच (Sand Witch) – सम्पुटाशः
फ्रूट जैम (Fruit Jam) – फलपाकः
फलों का रस (Fruit Juice) – फलरसः
आइस क्रीम (Ice Cream) – पयोहिमम्
मसाला डोसा (Masala Dosa) – सोपस्करदोसा
प्याज डोसा (Onion Dosa) – पलांडुदोसा
मूंग डोसा (Moong Dosa) – मुद् गदोसा
कालाग्राम डोसा (Blackgram Dosa) – माषदोस
तला हुआ चना (Fried Chana) – अभ्यूषः
रागी का दाना (Ragi Grain) – को�

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Dr Amit Rai Jain के फेसबुक वाल से साभार क्या जैन मतलब बणिया होता है ? #Jain_Bania  सोशल मीडिया पर चल रहे माहौल को देखते हुए मैं यह पोस्ट लिख रहा हूं,कि क्या जैन का अर्थ बणिया होता है,आमतौर पर सबकी यह धारणा होती है कि जैन से आशय बणिया/वैश्य वर्ण की एक जाति है।अगर आप भी ऐसा मानते हैं तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी के शिकार है।   जैन कोई जाति या वर्ण नहीं है,बल्कि यह स्वतंत्र धर्म है,इसे समझने के लिए हमें इसके इतिहास की ओर जाना पड़ेगा, जैन धर्म का अपना स्वतंत्र इतिहास है,यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना धर्म है,यहां तक कि वैदिक के भी पहले भी यहां के मूलनिवासियों का धर्म यही था,और इसके अनुयायी ही जैन थे, जिन्हें तत्कालीन समय में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता था।    अधिकतर लोग जानकारी के अभाव में जैन-धर्म को वैष्णव या हिंदू से जोड़कर देखते हैं,किंतु मूलनिवासी देवता शिव और प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव एक ही पुरुष थे, यहां का धर्म ऋषभदेव का अनुयायी ही था !    अंतिम तीर्थंकर महावीर के बाद जैन-धर्म दो परंपराओं में बंट गया,दिगंबर व श्वेतांबर। दिगंबर दक्षिण भारत में अधिक प्रचार...

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