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प्राकृत सामायिक दण्डक

 



प्राकृत सामायिक दण्डक

(गौतम गणधर प्रणीत पाठ का संक्षिप्त )

 

णमो अरहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं।

णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं॥

चत्तारि मंगलं - अरहंता मंगलं, सिद्धा मंगलं, साहु मंगलं, केवलिपण्णत्तो धम्मो मंगलं। चत्तारि लोगुत्तमा - अरहंता लोगुत्तमा, सिद्धा लोगुत्तमा साहु लोगुत्तमा, केवलिपण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमो। चत्तारि सरणं पव्वज्जामि - अरहंते सरणं पव्वज्जामि, सिद्धे सरणं पव्वज्जामि, साहु सरणं पव्वज्जामि, केवलिपण्णत्तं धम्मं सरणं पव्वज्जामि।

अड्ढाइज्ज-दीव-दो समुद्देसु पण्णारस-कम्म-भूमिसु, जाव अरहंताणं, भयवंताणं आदियराणं, तित्थयराणं, जिणाणं, जिणोत्तमाणं, केवलियाणं, सिद्धाणं, बुद्धाणं, परिणिव्वुदाणं, अंतयडाणं पार-गयाणं, धम्माइरियाणं, धम्मदेसयाणं, धम्मणायगाणं, धम्म-वर-चाउरंग-चक्क-वट्टीणं, देवाहि-देवाणं, णाणाणं दंसणाणं, चरित्ताणं सदा करेमि किरियम्मं। करेमि भंते! सामाइयं सव्वसावज्ज-जोगं पच्चक्खामि जावज्जीवं तिविहेण मणसा वचसा काएण, ण करेमि ण कारेमि, ण अण्णं करंतं पि समणुमणामि तस्स भंते ! अइचारं पडिक्कमामि, णिंदामि, गरहामि अप्पाणं, जाव अरहंताणं भयवंताणं, पज्जुवासं करेमि तावकालं पावकम्मं दुच्चरियं वोस्सरामि।

(कायोत्सर्ग पूर्वक 27 श्वसोच्छवास सहित नौ बार णमोकार मंत्र का जप करें।)

प्राकृत तीर्थंकर भक्ति

 (चौबीस तीर्थंकरों की यह भक्ति मूल प्रतिक्रमण पाठ में भी है और आचार्य कुन्दकुन्द रचित दशभक्ति में भी है  )

थोस्सामि हं जिणवरे, तित्थयरे केवली अणंतजिणे।

णरपवरलोयमहिए, विहुय-रयमले महप्पण्णे॥ १॥

लोयस्सुज्जोययरे, धम्मं तित्थंकरे जिणे वंदे।

अरहंते कित्तिस्से, चउवीसं चेव केवलिणो॥ २॥

उसह-मजियं च वंदे, संभवमभिणंदणं च सुमइं च।

पउमप्पहं सुपासं, जिणं च चंदप्पहं वंदे॥ ३॥

सुविहिं च पुप्फयंतं, सीयल सेयं च वासुपुज्जं च।

विमल-मणंतं भयवं, धम्मं संतिं च वंदामि॥ ४॥

कुंथुं च जिणवरिंदं, अरं च मल्लिं च सुव्वयं च णमिं।

वंदामि रिट्ठ-णेमिं, तह पासं वड्ढमाणं च॥ ५॥

एवं मए अभित्थुआ, विहुयरयमलापहीण-जरमरणा।

चउवीसं पि जिणवरा, तित्थयरा मे पसीयंतु॥ ६॥

कित्तिय वंदिय महिया, एदे लोगोत्तमा जिणा सिद्धा।

आरोग्ग-णाण-लाहं, दिंतु समाहिं च मे बोहिं॥ ७॥

चंदेहिं णिम्मलयरा, आइच्चेहिं अहिय-पयासंता।

सायर-मिव गंभीरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु॥ ८॥

तव-सिद्धे णय-सिद्धे, संजम-सिद्धे चरित्त-सिद्धे य।

णाणम्मि दंसणम्मि य, सिद्धे सिरसा णमंसामि॥

इच्छामि भंते! सिद्धभत्तिकाउस्सग्गो कओ तस्सालोचेउं, सम्मणाण-सम्मदंसण-सम्म-चरित्त-जुत्ताणं, अट्ठ-विहकम्म-विप्प-मुक्काणं, अट्ठगुण-संपण्णाणं, उड्ढ-लोए-मत्थयम्मि पइट्ठियाणं, तव-सिद्धाणं, णयसिद्धाणं,संजमसिद्धाणं, चरित्तसिद्धाणं, अदीदाणागद-वट्टमाण-कालत्तय-सिद्धाणं, सव्व-सिद्धाणं णिच्चकालं अंचेमि, पूजेमि, वंदामि, णमंसामि, दुक्खक्खओ, कम्मक्खओ, बोहिलाहो, सुगइगमणं, समाहि-मरणं, जिण-गुण-संपत्ति होउ मज्झं।

आलोचना

इच्छामि भंते! चरित्तायारो तेरसविहो, परिविहाविदो, पंचमहव्वदाणि, पंचसमिदीओ, तिगुत्तीओ चेदि। तत्थ पढमे महव्वदे पाणादिवादादो वेरमणं से पुढवि-काइया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा, आउकाइया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा, तेउकाइया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा, वाउकाइया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा, वणप्फदिकाइया जीवा अणंताणंता हरिया, बीआ, अंकुरा, छिण्णा, भिण्णा, एदेसिं उद्दावणं, परिदावणं, विराहणं उवघादो कदो वा, कारिदो वा, कीरंतो वा, समणुमण्णिदो तस्स मिच्छा मे दुक्कडं ॥ १॥

बेइंदिया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा कुक्खि-किमि-संख-खुल्लय-वराडय-अक्ख-रिट्ठय-गंडवाल-संबुक्क-सिप्पि-पुलविकाइया एदेसिं उद्दावणं, परिदावणं, विराहणं, उवघादो कदो वा, कारिदो वा, कीरंतो वा, समणुमण्णिदो तस्स मिच्छा मे दुक्कडं॥ २॥

तेइंदिया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा कुंथुद्देहिय-विंच्छिय-गोभिंद-गोजुव-मक्कुण-पिपीलिया-इया, एदेसिं उद्दावणं, परिदावणं, विराहणं, उवघादो, कदो वा, कारिदो वा, कीरंतो वा, समणुमण्णिदो तस्स मिच्छा मे दुक्कडं॥ ३॥

चउरिंदिया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा दंसमसय-मक्खि-पयंग-कीड-भमर-महुयर-गोमच्छियाइया, तेसिं उद्दावणं, परिदावणं, विराहणं, उवघादो कदो वा, कारिदो वा, कीरंतो वा, समणुमण्णिदो तस्स मिच्छा मे दुक्कडं॥ ४ ॥

पंचिंदिया जीवा असंखेज्जासंखेज्जा अंडाइया, पोदाइया, जराइया, रसाइया, संसेदिमा, सम्मुच्छिमा, उब्भेदिमा, उववादिमा, अवि-चउरासीदि-जोणि-पमुहसदसहस्सेसु एदेसिं उद्दावणं, परिदावणं, विराहणं, उवघादो कदो वा कारिदो वा कीरंतो वा, समणुमण्णिदो तस्स मिच्छा मे दुक्कडं॥ ५॥

(कायोत्सर्ग पूर्वक 27 श्वसोच्छवास सहित नौ बार णमोकार मंत्र का जप करें।)

 

 

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